पहला नवरात्र

पहला नवरात्र

पहला नवरात्र

सम्पूर्ण बर्ह्माण्ड देवीए शक्ति से संचालित हो रहा है. नवरात्र के नो दिन इसी शक्ति की आराधना का विशेष पर्व काल है, सभी अंको में नो को सर्वाधिक ऊर्जावान माना जाता है

नवरात्र के पहले दिन माँ दुर्गा के शैलपुत्री सव रूप की पूजा की जाती है . पर्वत राज हिमालय के यहाँ पुत्री रूप मैं उत्पन्न होने के कारण इनका नाम शैलपुत्री पड़ा . पूर्व जन्म में यह प्रजापति दक्ष की कन्या थी . तब इनका नाम सती था , इनका विवाह भगवन शंकरजी से हुआ था प्रजापति दक्ष के यज्ञ में सती ने अपने शारीर को भस्म कर अगले जनम में शेल राज हिमालय की पुत्री के रूप में जन्म लिया. पारवती और हेमवती भी उन्ही के नाम है . उपनिषद की एक कथा के अनुसार , इन्ही ने हेमवती स्वरुप से देवताओ का गर्व भंजन किआ था , नव दुर्गाओं मैं प्रथम शेल पुत्री का महत्व और शक्तिया अनन्त है नवरात्र पूजन मैं प्रथम दिन इन्ही की पूजा और उपासना की जाती है इस दिन उपासना मैं योगी अपने मनं को मूलाधार चक्र मैं स्थित कर साधना करते है.

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 पहला दिन वृषभ राशि के लिए विशेष फलदायी अन्य राशियों के लिए शुभ.