न्यूमरोलॉजी से जाने अपने पूर्व कर्मो के संचित कर्मों का क्या असर आपके वर्तमान पर पड़ रहा है

न्यूमरोलॉजी से जाने अपने पूर्व कर्मो के संचित कर्मों का क्या असर आपके वर्तमान पर पड़ रहा है

न्यूमरोलॉजी से जाने अपने पूर्व कर्मो के संचित कर्मों का क्या असर आपके वर्तमान पर पड़ रहा है


आपने ऐसे विवाहित जोड़े जरूर  देखे होंगे जिनकी आपस में बिल्कुल या कहिये बहुत कम बनती है । वे जब भी साथ होते हैं एक-दूसरे से उखड़े-उखड़े ही नजर आते हैं।  उनका पूरा जीवन सिर्फ और सिर्फ एक-दूसरे से लड़ते-झगड़ते और शिकायतें करते हुए ही बीत जाता है  ।दांपत्य सुख ना मिलने की वजह से वे दोनों एक-दूसरे से दूर होते जाते हैं और जब मौका मिलता है पारस्परिक आक्षेपों का सिलसिला शुरू कर देते हैं। पति को लगता है कि उसकी पत्नी सही नहीं है और पत्नी ये मान बैठती है कि सारी गलती उसके पति की है।  लेकिन यहां आपको एक बात पर अवश्य गौर करना चाहिए कि अगर किसी कारण आपके विवाहित जीवन में उथल-पुथल मची हुई है या आपका जीवनसाथी वैसा नहीं है जैसी कभी आपने कल्पना की थी तो इसके पीछे गलती उनकी नहीं बल्कि आपकी अपनी कुंडली की है।

 आमतौर पर विवाह करने से पूर्व जातक कुंडली मिलान जरूरी नहीं समझते केवल गुण मिलान कर संतुष्ट हो जाते हैं। यही उनकी सबसे बड़ी भूल होती है, क्योंकि गुण केवल एक उथला भाग है। सबसे ज्यादा जरूरी होता है होने वाले वर-वधु की कुंडली को मिलाना।ज्योतिषाचार्यों के अनुसार अगर ऐसा भी होता है की जो आपका लाइफ पार्टनर है आपके उमींदो के अनुसार नहीं है , या आपकी बात पर ज्यादा धयान नहीं देता, अत्याधिक ये उनकी नहीं आपके कुंडली की गलती है।

न्यूमरोलॉजी एक ऐसी विद्या है जिसके माध्यम से यह जाना जा सकता है की आपकी डेट ऑफ़ बिरथ मैं किस तरह का कॉम्बिनेशन है और इसी से बताया जा सकता है की आपकी कुंडली मैं मैरिटल ब्लिस है या नहीं , यही नहीं आपका डेट ऑफ़ बिरथ के अंको से पता चल जाता है की आपका विवाह के बाद अपने पार्टनर के साथ कैसा रिश्ता हो सकता है.

कभी आपने सोचा है कि दुनिया में इतने लोग हैं, यहां तक कि आपके जीवन में भी कितने ही लोग आते हैं लेकिन विवाह किसी खास से ही क्यों होता है? यह खास इसलिए है क्योंकि संबंधित व्यक्ति की छवि आपकी कुंडली में नजर आती है.

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार ये सब पूर्वजन्मों के संचित कर्मों का लेखा-जोखा है, इसे ऋणानुबंध भी कहा जाता है। अर्थात पूर्व जन्म में आपका संबंधित व्यक्ति से कोई ना कोई संबंध अवश्य रहा होता है, जो इस जन्म में वे आपकी लाइफ से इस कदर जुड़ जाते हैं कि संबंध को तोड़ पाना भी कठिन हो जाता है।जरूरी नहीं कि वह आपके साथ पति के ही रूप में जुड़ें, वह आपके पिता, माता, भाई, ससुराल पक्ष आदि किसी भी रिश्ते से जुड़ सकते हैं। दूसरे शब्दों में कहा जाए तो आपकी कुंडली आपके संचित कर्मों की बैलेंस शीट होती है। इसलिए जो आपको इस जन्म में प्राप्त हो रहा है वह आपके पिछले जन्म में किए गए कर्मों का ही फल है।

कभी आपने सोचा है कि दुनिया में इतने लोग हैं, यहां तक कि आपके जीवन में भी कितने ही लोग आते हैं लेकिन विवाह किसी खास से ही क्यों होता है? यह खास इसलिए है क्योंकि संबंधित व्यक्ति की छवि आपकी कुंडली में नजर आती है.

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार ये सब पूर्वजन्मों के संचित कर्मों का लेखा-जोखा है, इसे ऋणानुबंध भी कहा जाता है। अर्थात पूर्व जन्म में आपका संबंधित व्यक्ति से कोई ना कोई संबंध अवश्य रहा होता है, जो इस जन्म में वे आपकी लाइफ से इस कदर जुड़ जाते हैं कि संबंध को तोड़ पाना भी कठिन हो जाता है।जरूरी नहीं कि वह आपके साथ पति के ही रूप में जुड़ें, वह आपके पिता, माता, भाई, ससुराल पक्ष आदि किसी भी रिश्ते से जुड़ सकते हैं। दूसरे शब्दों में कहा जाए तो आपकी कुंडली आपके संचित कर्मों की बैलेंस शीट होती है। इसलिए जो आपको इस जन्म में प्राप्त हो रहा है वह आपके पिछले जन्म में किए गए कर्मों का ही फल है।

अगर आपका परिवार एक परफेक्ट फैमिली है आपके माता-पिता, भाई-बहन, पति या पत्नी और ससुराल पक्ष सब आपसे बहुत लगाव रखते हैं, आपसे प्रेम करते हैं तो ये भी आपके पूर्वजन्मों का ही फल है।वहीं इसके विपरीत अगर निजी जिन्दगी तनाव भरी है, जीवनसाथी या ससुराल पक्ष के साथ सामंजस्य नहीं बैठ पा रहा है तो यह भी आपकी कुंडली में दिखाई दे जाता है।इसके अलावा प्रोफेशनल लाइफ, कॅरियर कितनी ऊंचाई पर जाएगा, ऑफिस कर्मचारी कितने सहयोगी होंगे, आपको कितना स्ट्रगल करना पड़ेगा, यह सबपिछले जन्मों के फल के रूप में आपको इस जन्म में मिलेगा। जो आप कुंडली की सहायता से जान सकते हैं। आप किससे विवाह करेंगे यह भी पहले से ही तय होता है। ऐसा बिल्कुल नहीं है कि कोई रैंडम व्यक्ति आपके जीवन में आकर आपका लाइफ पार्टनर बन गया या आपके माता-पिता के रूप में आपके साथ जुड़ गया। यह सब पहले से ही निर्धारित होता है, बस हमें नहीं पता होता।अगर आपका वर्तमान जीवन तनाव भरा है, जीवनसाथी के साथ आपकी ट्यूनिंग नहीं बैठ पा रही है या फिर किसी अन्य समस्या का सामना करना पड़ रहा है तो इसका निदान भी आपकी कुंडली के द्वारा ही संभव है। जरूरत है तो एक अच्छे ज्योतिष शास्त्री की जिसके ज्ञान से आप अपनी कुंडली की कमियों को दूर कर सकते हैं।

कभी आपने सोचा है कि दुनिया में इतने लोग हैं, यहां तक कि आपके जीवन में भी कितने ही लोग आते हैं लेकिन विवाह किसी खास से ही क्यों होता है? यह खास इसलिए है क्योंकि संबंधित व्यक्ति की छवि आपकी कुंडली में नजर आती है.

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार ये सब पूर्वजन्मों के संचित कर्मों का लेखा-जोखा है, इसे ऋणानुबंध भी कहा जाता है। अर्थात पूर्व जन्म में आपका संबंधित व्यक्ति से कोई ना कोई संबंध अवश्य रहा होता है, जो इस जन्म में वे आपकी लाइफ से इस कदर जुड़ जाते हैं कि संबंध को तोड़ पाना भी कठिन हो जाता है।जरूरी नहीं कि वह आपके साथ पति के ही रूप में जुड़ें, वह आपके पिता, माता, भाई, ससुराल पक्ष आदि किसी भी रिश्ते से जुड़ सकते हैं। दूसरे शब्दों में कहा जाए तो आपकी कुंडली आपके संचित कर्मों की बैलेंस शीट होती है। इसलिए जो आपको इस जन्म में प्राप्त हो रहा है वह आपके पिछले जन्म में किए गए कर्मों का ही फल है।