इतिहास के पन्नो से - नाम का महत्व

इतिहास के पन्नो से - नाम का महत्व

इतिहास के पन्नो से - नाम का महत्व

गुरु नानक देव और मरदाना  एक बार किसी जंगल से जा रहे थे, मरदाना ने गुरु नानक देवजी को बड़ी विनम्रता से कहा महाराज बहुत भूख लगी है, मुस्कराते हुए नानकजी ने जवाब दिया की आप रोटियां सेक लो

उन्होंने जवाब दिया की नानकजी बहुत ठण्ड है , और हमारे पास कोई चूल्हा , तवा भी नहीं है और यहाँ का पानी भी बहुत ठंडा है ,नानकजी ने देखा की पास का तालाब छोटा सा था , जैसी ही नानकजी ने उसे छुआ तो पानी उबाल मारने लगा,

अब नानक जी कहते है की मरदाना अब रोटी सेक लो, फिर क्या था मरदाना ने आटे की चक्कियां तैयार की और उबलते हुए तालाब में डाल दी , न रोटी सिक्की और आटे की चक्की भी डूब गयी.

फिर दूसरी चक्की बनायीं वो भी दुब गयी , मरदाना बहुत ही परेशां हो कर वापिस नानकजी के पास पहुचे और बोला सच्चे पातशाह आप बोलते है की रोटियां सेक लो, पर कैसे रोटी और चक्की दोनों ही डूब गयी.

नानकजी ने बडे प्यार से उत्तर दिया- मरदाना रोटिया तो नाम लेकर ही सेकी जा सकती है , नाम लेकर रोटीया सको ,यह सुनकर मरदाना नानकजी के पैरो में गिर गए और बोले महाराज गलती हो गयी.

अब मरदाना पुनः तालाब के पास पहुचे और नाम लेकर चक्की तालाब में डाली और चमत्कार हो गया डूबी हुई चक्की और रोटी दोनों ही ऊपर आगयी .

अब मरदाना फिर नानकजी के पास पहुचे और पूछा की महाराज मुझे बताये यह चमत्कार कैसे हुआ, नानक देवजी कहते है की मरदाना नाम मै वो ताकत है की जो उस प्रभु का नाम श्रद्धा से लेता है वो प्रभु उसे किसी भी मुश्किल से निकल देता है , इसलिए मरदाना मुश्किल कितनी भी आये कभी भी उस प्रभु का नाम लेना मत छोड़ना.

और मरदाना को समझ आगया की नानकजी खुद भी किसी अवतार से कम नहीं है.

जिस तालाब को गुरु नानक देवजी ने सिफ्र अपने स्पर्श से ठन्डे पानी को उबाल कर गरम पानी मैं बदल दिया था वो वह आज भी है और उस पवित्र जगह को हम सब "मणिकरण साहिब" के नाम से जानते है.